मेरे पूर्वजों का घर

वो मकान था या घर था
न जाने कैसा आराम था
जहाँ आज भी चिठ्ठी
दीवान के नाम की आती थी

माँ को मैंने वही बाहर
पहली बार यूँ आँगन में खाना बनाते देखा
संध्या होना जहाँ सुबह से अधिक
आन्दित कर देता था जादू जैसे

यु ही खाट पर लेटे हुए
मंदिर की घंटियाँ सुकुन दे रही  थी
जब दूर से कही दरगाह की वाणी ने उससे मिलकर
जन्नत के और करीब ला दिया था

घर के बाहर मोटर गाड़ी न थे
था तो बस एक बड़ा सा कुआँ
पैदल ही घूम आते थे सब जगह
बस इतना सा वो शहर था

तारों के नीचे पहाड़ के ऊपर
एक किला मुझ पर नज़र रखता था
मझे बुलाता था, डराता था
आँखों ही आँखों में बातें करता था

कमरे अनेक थे पर बिजली न थी
शायद इसलिए ही सब इतने करीब थे
चाय की चुस्की, हँसी ठिठोली
ज़मीन पर बैठे आंगन में कर लेते थे

छत की दीवारे अब काली हरी भूरी हो गयी
उमर बताती थी इस दुनिया की
पहाड़ो से घिरा ये जहान छोटा था
या शायद विशाल था किसी की सोच सा

रहस्यो पुरानी यादों को समेटे
वो घर आज भी वहीँ था
चोंका  देने की क्षमता लेकर
कुछ न हो कर भी सब कुछ लेकर

Moonstruck

Make me feel special

Let me sense the force that attracts you

Look into my eyes

And don’t break the gaze.

I want to find your eyes fixed on me

And see the smile lingering on your lips

When your fingertips meet mine

Lets feel the chill down the spine

Put your arms around my waist

Pull me closer as you do

Don’t let the magic escape or fade

Let it be one night stand that feels like eternity

In the glory of us, lets create art

As I move back, you come forward

Trace my footsteps and come find me

Can you do this, will I do this

If not bound to then make it happen

nothing should stop us from being one

Reckless and crazy sparks will fly

When you and me will be.